यह विचार ही अनोखा है, कि जब सब गड़बड़ा जाए, तो कोई न कोई आ जाता है। बहुत ही सरल और उम्मीद भरा सूत्र है।
Geeta updesh
विचार
यह विचार ही अनोखा है, कि जब सब गड़बड़ा जाए, तो कोई न कोई आ जाता है। बहुत ही सरल और उम्मीद भरा सूत्र है।
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यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥
सरल हिन्दी अर्थ: जब-जब संसार में धर्म की हानि होती है और अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवान स्वयं धर्म की रक्षा और अधर्म के नाश के लिए अवतार लेते हैं।
Thoughts
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Permalinkयह गीता का कौन-सा हिस्सा है? चौथे अध्याय से लग रहा है। आपको यह श्लोक कब से याद है?
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Permalinkआपके लिए 'धर्म' का मतलब क्या रखता है? अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में आप इसे कहाँ देखती हैं?
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Permalinkयह विचार ही अनोखा है, कि जब सब गड़बड़ा जाए, तो कोई न कोई आ जाता है। बहुत ही सरल और उम्मीद भरा सूत्र है।
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