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Geeta updesh

Priya26
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यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥ सरल हिन्दी अर्थ: जब-जब संसार में धर्म की हानि होती है और अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवान स्वयं धर्म की रक्षा और अधर्म के नाश के लिए अवतार लेते हैं।

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सोचा

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dharm_tulna

आपके लिए 'धर्म' का मतलब क्या रखता है? अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में आप इसे कहाँ देखती हैं?

आपके लिए 'धर्म' का मतलब क्या रखता है? अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में आप इसे कहाँ देखती हैं?

पोस्ट सामग्री

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।

अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥

सरल हिन्दी अर्थ: जब-जब संसार में धर्म की हानि होती है और अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवान स्वयं धर्म की रक्षा और अधर्म के नाश के लिए अवतार लेते हैं।

Thoughts

  • pehle_granth

    यह गीता का कौन-सा हिस्सा है? चौथे अध्याय से लग रहा है। आपको यह श्लोक कब से याद है?

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  • dharm_tulna

    आपके लिए 'धर्म' का मतलब क्या रखता है? अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में आप इसे कहाँ देखती हैं?

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  • thomist_soch

    यह विचार ही अनोखा है, कि जब सब गड़बड़ा जाए, तो कोई न कोई आ जाता है। बहुत ही सरल और उम्मीद भरा सूत्र है।

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