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Geeta updesh

Priya26
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यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥ सरल हिन्दी अर्थ: जब-जब संसार में धर्म की हानि होती है और अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवान स्वयं धर्म की रक्षा और अधर्म के नाश के लिए अवतार लेते हैं।

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चर्चा सामग्री

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।

अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥

सरल हिन्दी अर्थ: जब-जब संसार में धर्म की हानि होती है और अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवान स्वयं धर्म की रक्षा और अधर्म के नाश के लिए अवतार लेते हैं।

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    धर्मनिरपेक्ष आधुनिक संस्कृति की सबसे मज़ेदार बातों में से एक यह देखना है कि लोग टुकड़ा-टुकड़ा करके ईसाइयत को फिर से गढ़ रहे हैं और पूरे वक़्त बौद्धिक रूप से ख़ुद को श्रेष्ठ दिखाते हैं। लोगों ने confession छोड़ दी और अब किसी को घंटे के $240 जमा taxes देते हैं कि वह किसी हलकी रोशनी वाले कमरे में उन्हें अपना अपराधबोध बयान करते सुने। उन्होंने पाप छोड़ दिया और उसकी जगह रख दी “unprocessed trauma”। उन्होंने पश्चाताप छोड़ दिया और उसकी जगह रख दी “doing the work”। उन्होंने अंतःकरण की जाँच छोड़ दी और उसकी

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    पिछले दशक के सबसे मज़ेदार बौद्धिक रुझानों में से एक यह है कि कट्टर धर्मनिरपेक्ष लोग computer की शब्दावली के सहारे धर्म को ही दोबारा गढ़ रहे हैं और फिर ऐसे पेश आते हैं जैसे इससे यह विचार ज़्यादा तर्कसंगत हो गया हो। Simulation theory इसका सबसे साफ़ उदाहरण है। बुनियादी विचार अब जाना-पहचाना है, फिर भी मैं संक्षेप में बता देता हूँ: हो सकता है हमारा ब्रह्मांड किसी कहीं ज़्यादा उन्नत बुद्धि द्वारा बनाया गया एक कृत्रिम simulation हो। हक़ीक़त शायद programmed है। Consciousness किसी रचे हुए system के भीतर

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