"बिना एक भी अपवाद के" वाला हिस्सा थोड़ा संभल कर। Malthusian trap एक मज़बूत pattern है, पर 1800 से पहले per-capita output का जो data है वह proxy है, असली series नहीं: कंकाल की लंबाई, मज़दूरी, अनाज के दाम। इनमें कुछ छोटे, बिखरे उभार दिखते हैं जो फिर बैठ गए। इससे post का मुख्य दावा नहीं गिरता, पर "law" को "बहुत मज़बूत regularity" पढ़िए, exceptionless नियम नहीं।
क्या ब्रिटेन का असली कारनामा वह छत तोड़ना था जो उससे पहले हर ज़िंदगी पर ढक्कन बनी थी?
क़रीब-क़रीब पूरे मानव इतिहास में जीवन-स्तर हिला ही नहीं। रोमन Gaul का किसान, मध्यकालीन इंग्लैंड का किसान, और शुरुआती Stuart राज का किसान—सब लगभग एक जैसे भौतिक स्तर पर जीते थे, क्योंकि कोई समाज जो भी फ़ालतू पैदा करता, उसे उन मुँहों में खपा देता जिन्हें वह फिर खिलाता था। अच्छी फ़सलें ज़्यादा बच्चे ख़रीदती थीं, बेहतर ज़िंदगियाँ नहीं।
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"बिना एक भी अपवाद के" वाला हिस्सा थोड़ा संभल कर। Malthusian trap एक मज़बूत pattern है, पर 1800 से पहले per-capita output का जो data है वह proxy है, असली series नहीं: कंकाल की लंबाई, मज़दूरी, अनाज के दाम। इनमें कुछ छोटे, बिखरे उभार दिखते हैं जो फिर बैठ गए।
चर्चा सामग्री
क़रीब-क़रीब पूरे मानव इतिहास में जीवन-स्तर हिला ही नहीं। रोमन Gaul का किसान, मध्यकालीन इंग्लैंड का किसान, और शुरुआती Stuart राज का किसान—सब लगभग एक जैसे भौतिक स्तर पर जीते थे, क्योंकि कोई समाज जो भी फ़ालतू पैदा करता, उसे उन मुँहों में खपा देता जिन्हें वह फिर खिलाता था। अच्छी फ़सलें ज़्यादा बच्चे ख़रीदती थीं, बेहतर ज़िंदगियाँ नहीं, और आबादी फिर भुखमरी के किनारे तक चढ़ आती। अर्थशास्त्री इसे Malthusian trap कहते हैं, और यह बिना किसी अपवाद के क़ायम रहा। फिर, क़रीब 1760 से 1840 के बीच इंग्लैंड के एक सीलन भरे कोने में, यह टूट गया। पहली बार, प्रति व्यक्ति उत्पादन में एक टिकाऊ बढ़त शुरू हुई जो तब से रुकी नहीं। यही ब्रिटेन की गौरव की घड़ी है, और यह सबसे असरदार काम है जो किसी भी देश ने कभी किया है।
इसे और भी हैरान करने वाली बात यह समझने से होती है कि वह छत कितनी पूरी तरह जमी हुई थी। अपने चरम पर Rome भव्य था, और एक रोमन सीनेटर के पास किसी मध्यकालीन राजा से ज़्यादा ऐशो-आराम थे। पर Rome ने फ़र्श कभी ऊँचा नहीं किया; आम रोमन दो हज़ार साल पहले के आम सुमेरियन से बेहतर नहीं खाता था। ब्रिटेन से पहले के साम्राज्य विजय से, ज़मीन-लोग-लगान जोड़कर बढ़ते थे। वे दौलत का पुनर्वितरण करते थे, प्रति व्यक्ति ज़्यादा नई दौलत बनाते नहीं। James Watt ने 1769 में जो बेहतर steam engine पेटेंट की, spinning jenny और water frame, Manchester की cotton mills जो भरपूर coal और iron खींच रही थीं—इन्होंने वह किया जो किसी विजय ने नहीं किया: इन्होंने इंसानी श्रम की एक इकाई से पहले से कहीं ज़्यादा उत्पादन कराया, और साल-दर-साल और ज़्यादा कराते रहे। ब्रिटेन ने बड़ा हिस्सा नहीं लिया। उसने बड़ी रोटी पकाई, और फिर पकाते रहना सीख लिया। इसने इतिहास का रुख़ मोड़ दिया—जिस capitalism को इसने ताक़त दी, उसने दौलत बटोरने के लिए विजय के युद्धों को बेकार बना दिया (हालाँकि यह समझने में क़रीब 200 साल और लगते)।
एक संभावित आपत्ति यह है कि यह सब ब्रिटिश प्रतिभा नहीं, ब्रिटिश क़िस्मत थी। coal जहाँ था वहीं था। साम्राज्य ने cotton और बाज़ार दिए। समय अनुकूल था। इसमें बहुत कुछ जायज़ है। पूछने लायक़ सवाल यह नहीं कि फ़्रांस या चीन के बजाय ब्रिटेन क्यों—यह तो coal की परतों और संयोग को लेकर झगड़ा है। सवाल यह है कि जब Rome के पास ब्रिटिश द्वीप थे, तब वहाँ क्यों नहीं? वजहें जो भी हों, यह ब्रिटेन ही था जिसने Industrial revolution शुरू की और उसे चलाए रखा। ब्रिटेन ने जो साबित किया वह यह था कि वह क़ानून तोड़ा जा सकता है—किसी समाज से, कुछ ख़ास हालात में, कम-से-कम एक बार। उस प्रदर्शन के बाद बाक़ी सब ब्योरा है। आग को बस एक जगह जलाना काफ़ी है ताकि वह फैल जाए, और वह फैली, Lancashire से पूरी दुनिया तक।
इसीलिए यह गंदा, धुएँ से घुटा, बेहद ग़ैरबराबर आधा-सदी का दौर उस navy और उस Parliament से बड़ा है जिनके लिए ब्रिटेन की आम तौर पर तारीफ़ होती है। सच कहूँ तो ब्रिटेन के लिए कोई एक "गौरव की घड़ी" चुनना बहुत मुश्किल है क्योंकि एक देश के तौर पर उसके पास गर्व करने को कई उपलब्धियाँ हैं। समुद्री ताक़त और प्रतिनिधि-शासन उपलब्धियाँ थीं, पर दूसरे देशों के पास भी ये रही थीं। गुज़ारे की हद से बाहर निकलना किसी ने नहीं चाहा था, क्योंकि किसी ने कल्पना ही नहीं की थी कि वहाँ तक पहुँचा जा सकता है। आधुनिक दुनिया, अपनी बढ़ती उम्र और इस मान्यता के साथ कि बच्चों को अपने माँ-बाप से बेहतर जीना चाहिए, उन्हीं mills में शुरू होती है। ब्रिटेन की सबसे गर्व की घड़ी वह क्षण थी जब एक समाज ने बस जीते रहना बंद किया और पहली बार चक्रवृद्धि होने लगा।
Thoughts
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Permalinkएक हिसाबी सवाल: "युद्ध से दौलत बेमतलब हो गई" को साबित होने में 200 साल लगे, यह post ख़ुद मानता है। तो उन 200 सालों में जो साम्राज्य चला, उसकी कमाई को इस loaf के net return में जोड़ें या घटाएँ? क्योंकि सारे ख़र्च जोड़ने के बाद ही पता चलता है कि किसने कमाया।
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Permalinkआगे बढ़ने से पहले: "per capita output" से यहाँ ठीक-ठीक क्या मापा जा रहा है। अगर यह बाज़ार में बिकने वाले माल का मूल्य है, तो घर के भीतर का काम, खेत की अपनी खपत, ये सब series से बाहर रह जाते हैं। एक ही नाप के दो अलग मतलब इस पूरी बहस को दो अलग नतीजों पर ले जाते हैं, इसलिए पहले यही तय हो।
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Permalink"बड़ी रोटी बनाई, बड़ा टुकड़ा नहीं छीना" वाली बात record के स्तर पर अधूरी रहती है। Manchester की mill में जो कच्चा cotton पहुँच रहा था, वह बागानों के बही-खाते में मुफ़्त मज़दूरी पर उगा था; उन खातों में आदमी की क़ीमत एक column है। "Rome क्यों नहीं" पूछकर आप उस column को मिटा देते हैं जिसने loaf की पहली रोटी का आटा दिया।
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Permalink"Rome क्यों नहीं" अच्छा सवाल है।
जवाब अक्सर यह निकलता है कि किसी के पास उस वक़्त coal का सही seam नहीं था, और फिर हम उसे "law टूट गया" कहकर भव्य बना देते हैं।
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Permalinkहर इतिहास की किताब navy और Parliament को सलामी देती है, और असली turning point किसी सीलन भरे कोने में एक spinning jenny था। बंदा जिसने कपड़े की मशीन सुधारी, उसका दर्जा उन सबसे ऊपर। मुझे यह उलट-पलट पसंद आई।
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Permalinkमज़ेदार बात: जिस "capital" से यह capitalism बना, उसकी जड़ Latin के 'caput' यानी सिर में है, जैसे मवेशी गिनना। पुराने ज़माने में दौलत का पैमाना ज़िंदा सिर थे, इंसान और जानवर। post का पूरा point यही है कि अमीरी का माप सिर गिनने (ज़मीन, लोग, टैक्स) से हटकर per-unit output पर आ गया। शब्द की जड़ बहस सुलझाती नहीं, पर यह दिखाती है कि असल छलाँग पैमाने में थी।
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Permalink"बिना एक भी अपवाद के" वाला हिस्सा थोड़ा संभल कर। Malthusian trap एक मज़बूत pattern है, पर 1800 से पहले per-capita output का जो data है वह proxy है, असली series नहीं: कंकाल की लंबाई, मज़दूरी, अनाज के दाम। इनमें कुछ छोटे, बिखरे उभार दिखते हैं जो फिर बैठ गए। इससे post का मुख्य दावा नहीं गिरता, पर "law" को "बहुत मज़बूत regularity" पढ़िए, exceptionless नियम नहीं।
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Permalink"British luck या genius" वाला सवाल ही frame को ग़लत जगह ले जाता है। असली material सवाल है: यह per-capita growth किसके श्रम और किसकी ज़मीन के ऊपर खड़ी हुई, और शुरुआती दशकों में वह बढ़ा हुआ output किसकी जेब में जमा हुआ। mill-मालिक और खदान के मज़दूर का per-capita एक ही औसत में गिनना उसी असमानता को छिपा देता है जिसे image caption ख़ुद मानता है। loaf बड़ा हुआ, यह सच है; पर किसने पकाया और किसने खाया, यह "detail" नहीं, यही पूरा सवाल है।
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Permalinkजो बात इस post को पसंद आने लायक बनाती है वह यही है कि growth एक बार चालू होने के बाद रुकी नहीं, हर साल थोड़ा और। यह compounding की वही ऊब है: छोटा सा per-unit सुधार जो रुके बिना जुड़ता रहे, सदियों में पहाड़ बन जाता है। James Watt की engine का असली कमाल एक छलाँग नहीं, यह था कि अगले साल फिर थोड़ा बेहतर हुआ, और किसी ने जमा करना बंद नहीं किया।
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PermalinkOP का सबसे मज़बूत रूप यह है कि एक बार आग जल जाए तो उसे एक जगह जलना काफ़ी है, और वह फैल गई। यह बात सच है। पर Rome वाले सवाल में एक चुप धारणा है कि "प्रगति" का मतलब बस output है। चीन और मुग़ल काल में रहने वालों ने अपनी ज़िंदगी को और भी पैमानों पर नापा। मैं OP को ख़ारिज नहीं कर रहा, बस याद दिला रहा हूँ कि कौन-सा पैमाना पहले रखा जाए, यह भी एक विरासती चुनाव है।
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