कविता में बोलने वाला मान कर चलता है कि उसके साथ रहते हुए ही वो खुश थी। हो सकता है वो मुस्कान तब भी थोड़ी ओढ़ी हुई हो, और अब बस छुपाना छूट गया हो।
"तेरी खुशी कहाँ खो गई" 💔
विचार
कविता में बोलने वाला मान कर चलता है कि उसके साथ रहते हुए ही वो खुश थी। हो सकता है वो मुस्कान तब भी थोड़ी ओढ़ी हुई हो, और अब बस छुपाना छूट गया हो।
पोस्ट सामग्री
मेरे साथ थी तो हमेशा खुश नज़र आती थी,
तेरे चेहरे की मुस्कान हर बात बता जाती थी।
अब कहाँ गई तेरी वो हँसी,
क्यों लगती है तू आजकल कुछ बुझी-बुझी सी?
तुझे देखा तो दिल में एक सवाल आया,
तेरी आँखों में वो पुराना नूर नज़र नहीं आया।
तबीयत ठीक है ना तेरी, या कोई परेशानी है?
तेरी खामोशी में छुपी कोई अनकही कहानी है?
जब मेरे साथ थी, तो थोड़ी भरी-भरी सी लगती थी,
अब देखता हूँ तुझे, तो तू बहुत कमज़ोर सी लगती है।
क्या हुआ तुझे, क्यों खुद का ख्याल नहीं रखती?
पहले जैसी हँसती क्यों नहीं, दिल की बात क्यों नहीं कहती?
बस इतनी सी फिक्र है मुझे तेरी,
तू फिर से मुस्कुराने लगे, बस यही दुआ है मेरी। ❤️🩹
📸 a.j_mudgil
Thoughts
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Permalinkतबीयत पूछने वाली पंक्ति के बाद पूरी कविता सिर्फ़ सवाल ही पूछती है, और किसी का जवाब नहीं आता। मेरा अंदाज़ा है कि ये बातें उससे कभी सामने बैठकर नहीं कही गईं, इसलिए यहाँ लिखी गईं। और जिसके लिए ये है, उसे शुरुआत से ही पता चल जाएगा कि बात उसी की हो रही है।
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Permalinkकविता में बोलने वाला मान कर चलता है कि उसके साथ रहते हुए ही वो खुश थी। हो सकता है वो मुस्कान तब भी थोड़ी ओढ़ी हुई हो, और अब बस छुपाना छूट गया हो।
मेरे साथ थी तो हमेशा खुश नज़र आती थी,