"सैलानी प्रकृति पहली बार देख रहे हों" और "सैलानी बेवक़ूफ़ हैं", ये दोनों एक बात नहीं है। ज़्यादातर लोग शहर में रहते हैं, उन्होंने कभी एक टन का जानवर सामने नहीं देखा। ये अक़्ल की कमी नहीं, अंदाज़े की कमी है। किसी गाँव वाले को पहली बार Delhi metro की rush में डाल दो, फिर देखो कौन किसको घूर रहा है।
क्या Yellowstone का असली अनुभव बस यही है कि आपको लगातार हिदायतें दी जाती रहें कि क्या नहीं करना (और bison को मत छूना)?
देखो, Yellowstone वस्तुनिष्ठ रूप से अद्भुत है। नज़ारा पागलपन भरा है: भाप छोड़ते इंद्रधनुषी रंगों के तालाब, कहीं से भी फूट पड़ने वाले geysers, कोहरे में घूमते bison के झुंड, जैसे किसी fantasy फ़िल्म का पहला दृश्य हो। पर Yellowstone जाने का असली अनुभव ज़्यादातर बस इतना है कि आपको तीखे लहज़े में हिदायतें दी जाती रहती हैं कि क्या-क्या नहीं करना।
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"सैलानी प्रकृति पहली बार देख रहे हों" और "सैलानी बेवक़ूफ़ हैं", ये दोनों एक बात नहीं है। ज़्यादातर लोग शहर में रहते हैं, उन्होंने कभी एक टन का जानवर सामने नहीं देखा। ये अक़्ल की कमी नहीं, अंदाज़े की कमी है। किसी गाँव वाले को पहली बार Delhi metro की rush म
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देखो, Yellowstone वस्तुनिष्ठ रूप से अद्भुत है। नज़ारा पागलपन भरा है: भाप छोड़ते इंद्रधनुषी रंगों के तालाब, कहीं से भी फूट पड़ने वाले geysers, कोहरे में घूमते bison के झुंड, जैसे किसी fantasy फ़िल्म का पहला दृश्य हो। पर Yellowstone जाने का असली अनुभव ज़्यादातर बस इतना है कि आपको तीखे लहज़े में हिदायतें दी जाती रहती हैं कि क्या-क्या नहीं करना।
hot springs को मत छूना। boardwalk से बाहर मत निकलना। bison के पास मत जाना। भालुओं को मत खिलाना। किसी पेड़ के आस-पास खड़े दिखे एक elk की वजह से सड़क के बीचों-बीच गाड़ी मत रोकना। thermal features में मत मरना।
हर कुछ मिनट में एक और signboard होता है जो ठीक-ठीक बताता है कि पार्क आपको कैसे मार सकता है। और वो भी कोई cool जंगली मौत नहीं। Yellowstone आपको बेहद शर्मनाक मौत की धमकी देता है। तेज़ाब-में-घुलकर मरने वाली मौत। धरती की पपड़ी-तोड़कर-गिरकर-उबल-जाने वाली मौत। “सैलानी ने चेतावनी के signboard नज़रअंदाज़ किए और soup बन गया” वाली मौत।
और लगता है कि ये चेतावनियाँ ज़रूरी हैं, क्योंकि Yellowstone के सैलानी ऐसे बर्ताव करते हैं जैसे पहली बार प्रकृति देख रहे हों। हर parking area में कम से कम एक बंदा Oakleys पहने हुए धीरे-धीरे किसी bison की ओर बढ़ता मिलेगा, उस इंसान के आत्मविश्वास के साथ जो अंजाम के ख़िलाफ़ कभी एक बार भी नहीं हारा।
ख़ुद bison ऐसे दिखते हैं जैसे किसी के नज़र में आने तक से उन्हें बुरा लग गया हो। ये trucks जितने बड़े होते हैं, हमेशा ग़ुस्से में, और पचास गज़ की दूरी से ही एक आदिम “मुझसे पंगा मत लेना” वाली ऊर्जा बिखेरते हैं।
यहाँ का traffic भी अपने आप में बेवक़ूफ़ी भरा है। दुर्घटनाओं या निर्माण की वजह से नहीं, बल्कि इसलिए कि किसी ने binoculars से एक भेड़िया देख लिया और अब अस्सी SUVs सड़क के बीचों-बीच ऐसे रुक गई हैं जैसे सभ्यता ढह गई हो।
और इस सबके बावजूद, Yellowstone है अद्भुत। यही तो खीझ वाली बात है। आधी trip आप झुँझलाहट में बिताओगे और बाक़ी आधी ऐसे नज़ारों को घूरते हुए जो पूरी तरह नक़ली लगते हैं।
किसी मोड़ पर पूरा पार्क दुनिया के सबसे ख़तरनाक outdoor museum जैसा लगने लगता है: दम निकाल देने वाला, न भूलने वाला, और ऐसे सैलानियों से भरा जिन पर तमीज़ से पेश आने का बिल्कुल भरोसा नहीं किया जा सकता।
Thoughts
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Permalinkसच में पूछ रहा हूँ, Yellowstone में बाक़ी जगहों से ज़्यादा हादसे होते हैं, या बस ज़्यादा दिखते हैं क्योंकि bison वाली मौत headline बनती है? सालाना लाखों visitor में wildlife से मौतें उँगलियों पर गिनी जा सकती हैं। "सब लापरवाह हैं" वाली feeling और असली number, दोनों अलग चीज़ें हैं।
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Permalinkदुनिया का इकलौता museum जहाँ exhibit तुम्हें वापस मार सकता है।
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Permalinkmuseum में गार्ड होता है जो हाथ रोक देता है। यहाँ बस एक signboard है और उम्मीद। signboard का record इस मुक़ाबले में बहुत ख़राब है।
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Permalinkअस्सी SUV एक भेड़िये के लिए बीच सड़क रुक गईं, ये feeling मैं समझता हूँ। पिछले हफ़्ते मेरी auto Mall Road पर पंद्रह मिनट अटकी रही क्योंकि आगे किसी ने गाय की फ़ोटो खींचने को गाड़ी रोक दी थी। गाय, यार। इन लोगों के पास तो फिर भी भेड़िया था।
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Permalinkवो "natural selection" वाली लाइन मज़ेदार है पर तकनीकी तौर पर ग़लत है। natural selection वहाँ काम करता है जहाँ कोई गुण अगली पीढ़ी में जाए। Oakley पहना वो बंदा अपने तीन बच्चे घर छोड़कर आया है। ये बस एक बेवक़ूफ़ी भरा हादसा है। हँसी आती है, पर इसमें Darwin को मत घसीटो।
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Permalinkएक बात समझ नहीं आई। अगर पार्क सच में इतना ख़तरनाक है, तो railing या barrier क्यों नहीं? पचास signboard लगाने से सस्ता तो एक मज़बूत बाड़ होती।
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Permalinkहर parking lot में वो Oakley वाला बंदा एक template है। हर पहाड़, हर बीच, हर जंगल में एक मिलेगा, "अंजाम के ख़िलाफ़ कभी न हारने वाला" वाला आत्मविश्वास लिए। bison उसके इस format को नहीं जानता, बस इतनी सी दिक़्क़त है।
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Permalinkpost में जो बात सबसे सही पकड़ी गई वो ये कि हर signboard बताता है "मत करो", पर कभी "क्यों" नहीं। "मत छूना, उबल जाओगे" और "मत छूना, मना है" से इंसान का बर्ताव अलग होता है। visitor दोनों को एक ही खाँचे में रख देता है, तो "तेज़ाब में घुल जाओगे" उसके दिमाग़ में "घास पर मत चलो" के बराबर बैठ जाता है। दिक़्क़त वहाँ है, लोगों की अक़्ल में नहीं।
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Permalink"सैलानी प्रकृति पहली बार देख रहे हों" और "सैलानी बेवक़ूफ़ हैं", ये दोनों एक बात नहीं है। ज़्यादातर लोग शहर में रहते हैं, उन्होंने कभी एक टन का जानवर सामने नहीं देखा। ये अक़्ल की कमी नहीं, अंदाज़े की कमी है। किसी गाँव वाले को पहली बार Delhi metro की rush में डाल दो, फिर देखो कौन किसको घूर रहा है।