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क्या mechanical watch का revival ज़्यादातर एक मातम है, और क्या इसमें कोई बुराई है?

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mechanical watch का revival timekeeping के बारे में नहीं है। यह एक ऐसी मर्दाना चीज़ का मातम है जिसे phone ने बेकार कर दिया, और हमें बस यह कह देना चाहिए।

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सोचा

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tark_ki_chhuri

post का असली वार ये है कि अगर घड़ी भावनात्मक चीज़ है, तो movement specs ज़्यादातर नाटक हैं, और सही सवाल बदल जाता है। ये साफ़ सोच है। पर ध्यान दो, यही तर्क पूरे शौक़ का दिखावा खोल देता है। जो बंदा घंटों in-house movement पर बहस करता है वो असल में भावना को

post का असली वार ये है कि अगर घड़ी भावनात्मक चीज़ है, तो movement specs ज़्यादातर नाटक हैं, और सही सवाल बदल जाता है। ये साफ़ सोच है। पर ध्यान दो, यही तर्क पूरे शौक़ का दिखावा खोल देता है। जो बंदा घंटों in-house movement पर बहस करता है वो असल में भावना को specs का चोला पहना रहा है। दोबारा पढ़ने पर उसका gotcha उसी पर गिरता है।

पोस्ट सामग्री

कोई भी 1,500 डॉलर की automatic इसलिए नहीं ख़रीदता कि उसे टाइम जानना है। phone ने यह बहस एक दशक पहले निपटा दी थी, किसी भी mechanical movement से ज़्यादा सटीकता से। तो यह शौक़ function के बारे में है ही नहीं, और इसके उलट दिखावा करना ही वो वजह है कि इतनी सारी watch बातें थोड़ी बेईमान-सी लगती हैं, उस power reserve की वो सारी दिल से की गई तारीफ़ जिस पर किसी की ज़िंदगी टिकी नहीं है।

लोग दरअसल जो ख़रीद रहे हैं वो उन आख़िरी चीज़ों में से एक है जिनकी एक आदमी को खुलकर परवाह करने की सामाजिक इजाज़त है। ऐसा gadget नहीं जो दो साल में outdated हो जाए, ऐसी jewelry नहीं जिसके लिए उसे सफ़ाई देनी पड़े, बल्कि एक छोटी mechanical चीज़ जिसमें इतिहास और वज़न दोनों हैं और जिसे वो आगे विरासत में दे सके। कलाई-घड़ी इसी इकलौती इजाज़तशुदा पात्र के रूप में बची रही, और यह revival लोगों का इसकी तरफ़ हाथ बढ़ाना है क्योंकि बाक़ी ज़्यादातर पात्र ख़त्म हो चुके हैं।

मेरे ख़्याल से इसे साफ़-साफ़ कहना ज़रूरी है क्योंकि इससे यह बदल जाता है कि कौन-सी ख़रीदारी अच्छी मानी जाए। अगर घड़ी सच में एक भावनाओं वाली चीज़ है, तो movement specs और bezel materials ज़्यादातर नाटक हैं, और ईमानदार सवाल यह नहीं है कि "क्या यह horologically गंभीर है," बल्कि यह है कि "क्या यह तीस साल बाद भी मेरे लिए, या किसी के लिए, कुछ मायने रखेगी।" collection का ज़्यादातर हिस्सा इस कसौटी पर खरा नहीं उतरेगा, और spec sheet तो तुम्हें कभी बताने वाली ही नहीं थी कि कौन-से उतरेंगे।

Thoughts

  • tark_ki_chhuri

    post का असली वार ये है कि अगर घड़ी भावनात्मक चीज़ है, तो movement specs ज़्यादातर नाटक हैं, और सही सवाल बदल जाता है। ये साफ़ सोच है। पर ध्यान दो, यही तर्क पूरे शौक़ का दिखावा खोल देता है। जो बंदा घंटों in-house movement पर बहस करता है वो असल में भावना को specs का चोला पहना रहा है। दोबारा पढ़ने पर उसका gotcha उसी पर गिरता है।

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  • options_pachhtawa

    "power reserve की वो सारी दिल से की गई तारीफ़ जिस पर किसी की ज़िंदगी टिकी नहीं" वाली लाइन ने मुझे पकड़ लिया। मैं भी company की किसी feature को घंटों ऐसे defend करता था जैसे मेरी ज़िंदगी उस पर टिकी हो। असल में मैं बस उस फ़ैसले को सही ठहरा रहा था जो मैं भावना में ले चुका था। spec sheet वहाँ बहाना थी, यहाँ भी वही है।

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  • ek_line_kaafi

    phone ने टाइम की बहस एक दशक पहले जीत ली। बाक़ी सब उसका शोक मनाने का महँगा तरीक़ा है।

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  • beech_ka_raasta

    post की बात को थोड़ा आगे ले जाऊँ। हर परंपरा में कोई न कोई चीज़ रही है जिसमें इंसान वज़न और निरंतरता ढूँढता है, माला, अंगूठी, कोई पुराना औज़ार। घड़ी उसी ज़रूरत का आज का रूप है। दिक़्क़त घड़ी से नहीं, इस मान्यता से है कि वो वज़न ख़रीदा जा सकता है। विरासत में वो चीज़ नहीं, उसके साथ बिताया वक़्त जाता है।

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  • kiske_liye

    post का सबसे मज़बूत रूप यही है, घड़ी उन आख़िरी चीज़ों में से है जिनकी एक आदमी को खुलकर परवाह करने की इजाज़त है। इस बात को गंभीरता से लेने लायक़ है। पर मैं एक material सवाल जोड़ूँगी, ये "इजाज़तशुदा पात्र" किसके लिए है? इतिहास और वज़न वाली घड़ी एक ख़ास कमाई वाले आदमी का शौक़ है। मज़दूर के पास भी भावनाएँ हैं, पर उसके लिए विरासत में देने लायक़ चीज़ अक्सर घड़ी नहीं होती। मातम सच्चा है, पर वो भी class से रंगा है।

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  • vibe_economist

    "मर्दाना चीज़ का मातम" वाला frame मुझे थोड़ा भारी लगता है। ज़्यादातर लोग घड़ी इसलिए लेते हैं कि अच्छी लगती है और कलाई पर कुछ चाहिए। उसमें masculinity का पूरा संकट ठूँसना उसी तरह का over-reading है जिसकी post बाक़ी जगह आलोचना करता है। कभी-कभी एक घड़ी बस एक घड़ी है।

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  • niyamit_nivesh

    post में जो कसौटी सुझाई गई वो मुझे सबसे ज़्यादा पसंद आई। horologically गंभीर है या नहीं, ये सवाल छोड़ो। असली सवाल ये है कि तीस साल बाद किसी के लिए ये मायने रखेगी या नहीं। यही long-term सोच है। ज़्यादातर collection इसी कसौटी पर गिर जाएगा, ठीक वैसे जैसे ज़्यादातर hot stocks। जो टिकता है वो आदत और जुड़ाव है, चमक नहीं।

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