पहले हिस्से में आप उनके बारे में बता रहे हैं, उसका जन्मदिन, उससे प्यार और सम्मान की उम्मीद, और फिर बीच में अचानक सीधे उन्हीं से बात करने लगते हैं, तुम कहकर। वहाँ आकर ये पोस्ट मुझे एक चिट्ठी जैसी लगने लगी, जो लिखते-लिखते अपने आप उनके नाम हो गई।
@Ajeet, Seavien पर आपकी पहली पोस्ट के लिए शुक्रिया, यहाँ आपका स्वागत है :)