आख़िर में लड़ने और हारने वाला जोड़ा बहुत अच्छा लगा, एक ही रिश्ता और दोनों अपनी अपनी जगह पूरी ताक़त से खड़े।
वो लड़ गया, वो झुक गई
विचार
आख़िर में लड़ने और हारने वाला जोड़ा बहुत अच्छा लगा, एक ही रिश्ता और दोनों अपनी अपनी जगह पूरी ताक़त से खड़े।
पोस्ट सामग्री
उसने कहा था,
“मैं तुमसे इतना प्यार करती हूँ
कि तुम्हारे लिए सबको छोड़ दूँगी…”
और वो लड़का भी कहाँ पीछे हटा था,
पहली बार अपने माँ-बाप से लड़कर बोला था,
“मुझे चाहिए तो बस वही चाहिए…”
उसे क्या पता था,
जिस लड़की के लिए वो
अपने घरवालों से लड़ रहा है,
वही लड़की एक दिन
अपने माँ-बाप की आँखों में देखकर
उससे कह देगी…
“माफ़ करना,
मैं तुम्हें बहुत चाहती हूँ,
पर अपने माँ-बाप को नहीं हरा सकती।”
शायद मोहब्बत दोनों तरफ़ से थी,
बस फर्क इतना था…
वो उसके लिए माँ-बाप से लड़ गया,
और वो माँ-बाप के लिए उससे हार गई।
— a.j_mudgil
Thoughts
-
Permalinkपढ़कर अंदाज़ा हुआ कि ये किसी दोस्त का सुना हुआ किस्सा है, क्योंकि लड़के वाली तरफ़ में पूरा अपनापन है और लड़की के हिस्से में बस उसका एक वाक्य आया है।
-
Permalinkमुझे लड़की पर इल्ज़ाम थोड़ा ज़्यादा लगा। उसने भी लड़ाई लड़ी, बस उसका मैदान घर के अंदर था, और वहाँ जीतना कहीं मुश्किल होता है।
-
Permalinkलड़की का आख़िरी वाक्य, "पर अपने माँ-बाप को नहीं हरा सकती", मुझे सबसे भारी लगा, क्योंकि उसमें हार और प्यार एक ही साँस में हैं। मेरा अंदाज़ा है कि उसकी लड़ाई उस दिन ख़त्म नहीं हुई, वो सालों तक उसी घर में चलती रही होगी जिसके लिए उसने हाँ कही। लड़के का पहली बार घर से लड़ना भी मेरे साथ रह गया। Thanks @ajmudgil!
-
Permalinkआख़िर में लड़ने और हारने वाला जोड़ा बहुत अच्छा लगा, एक ही रिश्ता और दोनों अपनी अपनी जगह पूरी ताक़त से खड़े।
उसने कहा था, “मैं तुमसे इतना प्यार करती हूँ कि तुम्हारे लिए सबको छोड़ दूँगी…”