कैसे मिले थे हम, ये आज भी याद आता है,
एक लोटा जल चढ़ाया था शिव को,
और तू मेरी ज़िंदगी में आ जाता है।
अजीब इत्तेफ़ाक था हमारी मुलाकात का,
जिसे माँगा था मैंने महादेव से,
कभी चेहरा तक नहीं देखा था उसका।
वो मेरे घर के पीछे वाली गली में रहती थी,
रास्ते तो पास थे हमारे,
पर किस्मत को हमारी मुलाकात की जल्दी नहीं थी।
फिर एक दिन महादेव ने ऐसा संयोग बनाया,
जो कभी नज़र तक नहीं आया था,
वो इंसान मेरी ज़िंदगी का सबसे ख़ास हिस्सा बन गया।
मैंने तो बस एक लोटा जल चढ़ाया था,
मुझे क्या पता था भोलेनाथ,
मेरी एक छोटी-सी पूजा में
मेरी पूरी दुनिया छिपाकर बैठे थे।
पर आज दिल में एक सवाल रह जाता है,
जिस शिव ने हमें मिलाया था,
वही आज हमें इतना दूर क्यों देखता है?
जिसे कभी महादेव से माँगकर पाया था,
आज उसी को याद करके रोना पड़ता है,
शायद कुछ मुलाकातें किस्मत में हमेशा रहने के लिए नहीं,
बस ज़िंदगी भर याद रहने के लिए लिखी होती हैं। 🥀